एनएच-48 के पास धारूहेड़ा और बावल में मिट्टी परीक्षण का काम शुरू, रिपोर्ट बताएगी मेट्रो ट्रैक के लिए कैसे पिलरों की जरूरत

rapid-rail-660-pic
[woo_file_dropzone_product_detail_page]
rapid-rail-660-pic रेवाड़ी में मेट्रो चलाने के प्रोजेक्ट ने आखिर धरातल पर दस्तक दे दी है। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत जिले के धारूहेड़ा और बावल में सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी परीक्षण) का काम शुरू हो चुका है। दिल्ली-जयपुर हाईवे के साथ-साथ पिलरों के ऊपर मेट्रो का ट्रैक गुजरेगा। इसलिए बोरिंग के माध्यम से सैंपल लिए जा रहे हैं। इन सैंपल की रिपोर्ट से मिट्टी की क्षमता आंकी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही ये तय होगा कि इस इलाके की मिट्टी पर मेट्रो प्रोजेक्ट खड़ा करने के लिए किस तरह के पिलरों की जरूरत होगी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) द्वारा इस काम के बाद ही रैपिड मेट्रो के लिए ट्रैक बिछाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। क्षेत्र के लिए अपने आप में ये सबसे बड़ी सौगात होगी, क्योंकि रेवाड़ी के साथ ही बावल और धारूहेड़ा में भी स्टेशन बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पूरा होने में करीब 5 साल का वक्त लगेगा। 45 दिन का समय, जयपुर की लैब से आएगी रिपोर्ट एनसीआरटीसी द्वारा राइट्स को सॉइल टेस्टिंग का काम दिया गया है। राइट्स यह कार्य जयपुर की सीईजी टेस्ट हाउस के माध्यम से करा रही है। प्रोजेक्ट पर लगे अधिकारियों ने बताया कि कंपनी को टेस्टिंग सैंपल के लिए करीब 45 दिन का समय दिया गया है। इसके लिए हर 100 मीटर पर बोरिंग मशीन से बोर करके मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं। करीब 50 मीटर गहराई तक यह बोर किया जाता है। कंपनी के कर्मचारी हर 7-8 सैंपल के बाद इन्हें जांच के लिए जयपुर की लैब में भेज रहे हैं। वहीं से सॉइल टेस्टिंग रिपोर्ट तैयार होगी। अलग-अलग चरणों में सॉइल टेस्टिंग का काम किया जाएगा। गुड़गांव से आगे धारूहेड़ा तथा अब अगले चरण में बावल से शाहजहांपुर बॉर्डर तक सैंपल लिए जाएंगे। कंपनी फिलहाल बावल चौक से शाहजहांपुर बॉर्डर तक करीब 12 किलोमीटर में सैंपलिंग का काम करेगी। प्रोजेक्ट के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं… ट्रेनों की डिजाइन गति 180 किमी. प्रति घंटा होगी कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली से सोतानाला की 141 किमी की दूरी लगभग 90 मिनट में तय होगी। ट्रेनों की डिज़ाइन गति 180 किमी प्रति घंटा होगी। हालांकि इनकी संचालन गति 160 किमी प्रति घंटे होगी। यह गति मेट्रो ट्रेन की औसत से तीन गुना तेज होगी। कॉरिडोर में 22 स्टेशन होंगे इस पूरे कॉरिडोर में कुल 22 स्टेशन बनाए जाएंगे। यह मेट्रो ट्रैक दिल्ली सराय कालेखां से गुड़गांव और रेवाड़ी होते हुए अलवर तक होगा। रेवाड़ी क्षेत्र में धारूहेड़ा से मेट्रो एंट्री करेगी। इसके बाद हाईवे के साथ बढ़ते हुए आगे आएगी। रेवाड़ी के पास स्टेशन होगा तथा इसके बाद बावल स्टेशन होगा। आरआरटीएस प्रोजेक्ट 3 चरणों में पूरा होगा दिल्ली-गुड़गांव-अलवर आरआरटीएस परियोजना को 3 चरणों में लागू किया जाना है। तीनों चरणों को मिलाकर कॉरिडोर की कुल लंबाई 199 किमी है। पहले चरण में दिल्ली-गुड़गांव-एसएनबी अर्बन कॉम्प्लेक्स (106 किमी) का निर्माण किया जाएगा। एसएनबी से अर्थ है शाहजहांपुर, नीमराणा व बहरोड। दूसरे चरण में एसएनबी से सोतानाला (35 किमी) तक रेल लाइन डाली जाएगी। तीसरे चरण में इसे अलवर (58 किमी) लगाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आधुनिक ट्रांसपोर्ट : जिले में धारूहेड़ा व बावल औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही राजस्थान क्षेत्र के भिवाड़ी-टपूकडा-खुशखेड़ा (बीटीके) जैसे उभरते औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सुविधा मिलेगी। बता दें कि एनसीआरटीसी ने कॉरिडोर के काम में तेजी लाने के लिए गुड़गांव में साइट ऑफिस भी शुरू किया जा चुका है। 5 से 10 मिनट में उपलब्ध होगी ट्रेन आरआरटीएस स्टेशनों को विशिष्ट रूप से डिज़ाइन किए जा रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक स्टेशन पर प्लेटफार्म स्क्रीन दरवाजे होंगें। ट्रेनें 5 से 10 मिनट में उपलब्ध होंगी। सिग्नलिंग, दूरसंचार और स्वचालित किराया के लिए स्टेट ऑफ द आर्ट तकनीक का प्रयोग होगा। ट्रेनों में आरामदायक वातानुकूलित कोच होंगे। इनमें एक बिजनेस क्लास कोच होगा और बाकी इकॉनमी क्लास होंगे।   Source of link – https://www.bhaskar.com/state/haryana/news/haryana-news-soil-test-work-started-in-dharuhera-and-bawal-near-nh-48-report-will-tell-how-pillars-needed-for-metro-track-082537-6312684.html
Interested in buying a Property in Dharuhera